Budget 2021-22: सुधार कार्यों को मजबूती देगा आगामी बजट, टैक्स व्यवस्था को और पारदर्शी बनाने की कोशिश

 

Budget 2021-22

सदी की सबसे बड़ी महामारी कोरोना वायरस के बाद लगे लॉकडाउन से दम तोड़ती भारत की इकोनॉमी को फिर से पटरी पर लाने की जद्दोजहद में केंद्र सरकार जुटी हुई है। आगामी बजट Budget 2021-22 का उद्देश्य लंबे समय तक तेज आर्थिक विकास की जमीन तैयार करने पर केंद्रित रहने वाला है।

बता दें कि आगामी सोमवार को भारत की वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण अगले वित्त वर्ष के लिए आम बजट Budget 2021-22 पेश करने वाली हैं। इसके जरिए उन्हें आपदा को अवसर में बदलने के पीएम मोदी के नारे को असल रूप देना होगा।

Budget 2021

हाल ही के दिनों में अपनी सुधारवादी नीतियों के चलते विपक्ष के निशाने पर रही केंद्र सरकार इस बात पर अड़ी है कि भारत जैसे विशाल देश की अर्थव्यवस्था को कई सेक्टरों में सुधारों के द्वारा ही आगे बढ़ाया जा सकता है। ये सुधार ही देश में गरीबी भी दूर करेंगे और समाजिक ढ़ांचे को भी मजबूती देंगे।

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इस बात का इशारा शुक्रवार को पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2020-21 में दिए गए हैं। सर्वेंक्षण से सरकार की भावी आर्थिक नीतियों की सोच नजर आ रही है। वह बताती है कि राजकोषीय प्रबंधन को लेकर सरकार अभी बहुत माथा-पच्ची नहीं करने जा रही।

Budget 2021

सर्वेक्षण का यह इशारा भी साफ है कि हेल्थ सेक्टर आगामी बजट Budget 2021-22 के लिए और इसके बाद भी केंद्र सरकार की नीतिगत सोच की केंद्र में रहेगा।

वित्त मंत्री देश के हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर में किसी बड़े बदलाव का खाका पेश करेंगी कि नहीं, या सरकार प्राइवेट हेल्थ सेक्टर के बेहतर नियमन के लिए कदम उठाएगी कि नहीं, ये सवाल आर्थिक सर्वे में उठाए गए हैं।

Budget 2021-22

इसी तरह सरकार ने संकेत दिए हैं कि कई सेक्टरों में नियमन जरूरत से ज्यादा हो गया है। अब इस बारे में इस बजट Budget 2021-22 में कदम उठाया जाता है या आगे के लिए छोड़ दिया जाता है, इसके लिए भी बजट का इंतजार  करना होगा।

हाल के दिनों में सरकार ने कृषि, श्रम व उद्योग  सेक्टर में जो सुधार किए हैं, सर्वे में उसे भारत को एक मजबूत वैश्विक इकोनॉमी बनाने की दिशा में उठाया कदम बताया गया है। ऐसे में साफ है कि आगामी बजट में सरकार दूसरे सुधारों को लेकर भी बेहद मुखर हो सकती है।

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बता दें कि अगले वित्त वर्ष में भारत स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च को दोगुना कर सकता है। भारत सरकार स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च को चार साल में जीडीपी के 4 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य कर सकती है।

सूत्रों ने बताया कि कोरोना वायरस महामारी के बाद भारत स्वास्थ्य प्रणाली को बेहतर करना चाहता है और बजट में अगले वित्त वर्ष के लिए स्वास्थ्य खर्च को दोगुना कर सकता है।

भारत एक अप्रैल, 2021-22 से शुरू हो रहे वित्त वर्ष के लिए स्वास्थ्य खर्च को बढ़ाकर 1.2 से 1.3 लाख करोड़ रुपये कर सकता है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह बात कही है।

गौरतलब है कि मौजूदा वित्त वर्ष में अनुमानित स्वास्थ्य खर्च 626 अरब रुपए है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को आम बजट पेश करने जा रही हैं। वित्त मंत्री ने ऑन रिकॉर्ड कहा है कि यह बजट सौ वर्षों का सबसे अच्छा बजट होगा।

Budget 2021

इस बजट में वित्त मंत्री नया हेल्थकेयर प्लान जारी कर सकती है। यह योजना सार्वजनिक नहीं होने के चलते अधिकारियों ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर यह जानकारी दी है।

कई दशकों तक उच्च वृद्धि दर के बावजूद, भारत का स्वास्थ्य क्षेत्र पर होने वाला खर्च जीडीपी का 1.3 फीसद ही है। यह विकसित और BRICS देशों (ब्राजील-रूस-इंडिया-चीन-साउथ अफ्रीका) की तुलना में काफी कम है। अगले चार सालों में इसे जीडीपी का 4% करने का लक्ष्य रखा गया है।

महामारी के दौरान कई कोविड देखभाल केंद्रों और कई अस्पतालों में राज्यों द्वारा बेड और ऑक्सीजन सिलेंडरों की मांग को पूरा करने के प्रयासों से देश की अंडरफंडेड स्वास्थ्य प्रणाली को कुछ राहत मिली है।

बता दें कि देश में अब तक 1,06,77,937 कोरोना वायरस के मामले आ चुके हैं। इनमें से 1,03,45,661 लोग ठीक हो चुके हैं। 1,74,193 लोगों में यह वायरस अभी भी सक्रिय है। वहीं, 1,53,626 लोगों की इस वायरस से दु:खद मृत्यु हो चुकी है।

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