5 लाख डॉलर तक ले जा सकती है Real Estate भारत की Economy

 Real Estate  GDP  में 7% का योगदान देता है। एक अनुमान के अनुसार 2030 तक इसका आकड़ा 13% तक पहुंच सकता है। लॉक डाउन के समय में Real Estate के व्यापार पर बहुत असर पड़ा है। लॉक डाउन के चलते Real Estate  इस समय ठप पड़ा है। लेकिन इस बात को भी नहीं नाकारा जा सकता की Real Estate इकॉनमी पर ख़ास ज़ोर डालता है।

Real Estate

इसमें देश के 15 पर्सेंट कामगारों को रोजगार मिला हुआ है। इस सेक्टर में जो होता है उसका असर 270 इंडस्ट्री पर दिखता है।

एक अनुमान के मुताबिक, 2025 में Real Estate सेक्टर का साइज एक लाख करोड़ रुपये का हो सकता है। जहां तक इकोनॉमी पर असर डालने की बात है, तो उस हिसाब से कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री 14 प्राइमरी सेक्टर में तीसरे नंबर की है। यह सेक्टर देश को 5 लाख करोड़ डॉलर की इकोनॉमी बनने में मदद करेगा। ऐसे में Real Estate बॉडी नरेडको ने सेक्टर को बजट से बहुत कुछ मिलने की उम्मीद जताई है।

रेंटल हाउसिंग

हाउस रेंट अलॉएंस (HRA) पर टैक्स छूट बढ़ाई जानी चाहिए। इसके अलावा, रेंटल इनकम से होने वाले लॉस को अगले साल शिफ्ट करने की इजाजत होनी चाहिए। हाउसिंग प्रॉपटी की रेंटल इनकम पर 10 पर्सेंट के फ्लैट रेट से टैक्स लगाया जाना चाहिए या फुल डिडक्शन का लाभ दिया जाना चाहिए। इसके अलावा Real Estate डेवलपर्स को प्रॉफिट पर 10 साल का टैक्स हॉलिडे दिया जाना चाहिए।

अफोर्डेबल हाउसिंग

इसकी स्कीम के अंदर मकानों का निर्माण पूरा करने के लिए छह साल का समय दिया जाना चाहिए। लोन की सस्ती ब्याज दरों का लाभ सभी कैटेगरी के मकानों के लिए दिया जाना चाहिए। अफोर्डेबल कैटेगरी में आने वाले मकानों की की कीमत की लिमिट 45 लाख रुपये से बढ़ाकर एक करोड़ रुपये कर दिया जाना चाहिए।

इनकम टैक्स डिडक्शन

मकानों की किस्त पर चुकाए जाने वाले ब्याज पर पूरा टैक्स डिडक्शन दिया जाना चाहिए। नहीं तो इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 24 में ब्याज के भुगतान पर दो लाख रुपये की डिडक्शन लिमिट को बढ़ाकर पांच लाख कर देना चाहिए। इसके अलावा, रेंटल प्रॉपर्टी का लॉस दूसरी इनकम से एडजस्ट करने की भी इजाजत दी जानी चाहिए। अगर ऐसा न हो तो कम से कम नए साल के लिए उसके फुल एडजस्टमेंट की सहूलियत होनी चाहिए।

इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम

रिजर्व बैंक और नेशनल हाउसिंग बैंक को सबवेंशन स्कीमों पर लगा बैन हटा लेना चाहिए। इसका सीधा फायदा मकान खरीदने वालों को होगा। इस स्कीम में बायर मकान की कीमत का 20 पर्सेंट तक का हिस्सा शुरुआत में चुका देता है। इसमें लोन की बाकी रकम बैंक या फाइनेंस कंपनी कंस्ट्रक्शन के स्टेज के हिसाब से डेवलपर्स को देती है।

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस

शेयरों की तरह मकान को भी एक साल रखकर बेचने से उससे होने वाले मुनाफे पर LTCG का लाभ दिया जाना चाहिए। ऐसा होने पर मकान बेचने वाले को 20% के बजाय 10% का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स देना होगा।

वन टाइम रिस्ट्रक्चरिंग

रिजर्व बैंक ने कोविड-19 के कारण हुई वित्तीय समस्याओं के चलते डेट रिस्ट्रक्चरिंग की इजाजत दी है। उसके साथ एक शर्त के साथ जोड़ी है जिससे ज्यादातर यूनिट को इसका बेनेटिफ नहीं मिल पाता है। सेक्टर और इकोनॉमी पर इसका पॉजिटिव इफेक्ट हो, इसके लिए यह सुविधा सबको दी जानी चाहिए।

SWAMIH फंड

इस समय सवा लाख करोड़ रुपये के किफायती मकानों और मिड इनकम ग्रुप के मकानों वाले प्रोजेक्ट अटके हुए हैं। उसके लिए सरकार ने शुरुआत में 25,000 करोड़ रुपये का SWAMIH फंड बनाया था। डेवलपर्स को फटाफट लोन मिले इसके लिए होम लोन कंपनियों और NBFC को ऐसा फंड बनाने की इजाजत दी जानी चाहिए।

एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग

​​​​​​​Real Estate कंपनियों को ECB के जरिए विदेश से सस्ती दरों पर फंड जुटाने की इजाजत दी जानी चाहिए।

 

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