वोटर नहीं है बच्चे. कोट क्यों
देगी सरकार?
एक तरफ जहां मोदी और योगी सरकार ने
नमामी गंगे के साथ रामराज्य की बात करते हैं. वहीं रामभूमि पर आज देश के भविष्य
सुरक्षित नहीं है. सुबे कि येगी सरकार दावा करती है कि प्रदेश में अपराध और दंगा
नाम के बराबर है. सवाल ये है कि क्या सच में यूपी अपराध मुक्त है?.प्रदेश
में हो रहे अपराध को छोड़ दीजिए क्योंकि जिस प्रदेश में बच्चे के जीवन के साथ
खिलवाड़ होता है तो यहां अपराध की कतई नहीं है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ देशभर
में ढिडोंरा पिटते है कि उत्तर प्रदेश में सबकुछ सही है.केवल इतना ही नहीं कहतें
है कि प्रदेश में कानुन व्यवस्था पहले से बेहतर है शिक्षा व्यवस्था में भी सुधार
किया गया है. मान्यवर से ये सवाल है कि जब स्कुल और कॉलेज में शिक्षक ही न हो. तो
किस बात कि सुधार कि बात कर रहें योगी . गौरतलब
है कि प्रदेश में कुछ दिन पहले ही केंद्र सरकार व्दारा चलाया जा रहा मध्याह्न भोजन
में कभी मृत चूहा मिलता है तो कभी बच्चे को नमक रोटी परोसा गया था. जो दुनियाभर
में चर्चा का विषय बना था.
रामराज्य में गाय के नाम पर राजनीति
भी कम नहीं होता है. गाय की बात करे तो भाजपा के नेता व सांसद ने तो बयानबाजी में
विज्ञान को भी पिछे छोड़ दिया है.कई कहता ही कि गोमुत्र से कैंसर खत्म हो जाता है
तो कई कहता है कि गाय कि दूध में सोना मिलता है. बात करे सुबे कि मुख्या योगी
आदित्यनाथ ने गाय को कोट देने कि घोषणा कर दिया. घोषणा के तुरंत बाद गाय को कोर्ट
वितरण भी किया गया. लेकिन देश के भविष्य कहे जाने वाले बच्चे के लि स्वेटर देने के
लिए पैसे नहीं है. खास बात ये है कि
सरकारी स्कुल में युनिफर्म प्रदान किया जाता है. वहीं ठंडी के मौसम में कोट दिया
जाता है. सरकार के हवाले से खबर है कि
प्रदेश के सभी सरकारी स्कुल में स्वेटर दिया जा चुका है. मगर सरकार के ये दावा महज
दावा ही है क्योंकि गोंडा जिला के ये प्राथमिक विद्यालय में स्कुल के बच्चे को
स्वेटर नहीं मिला. जिसके कारण बच्चे खुले आसमान के निचे जमिन पर बैठे पढ़ाई करते
नजर आ रहें है.गौरतलब है कि ठंडी का मौसम आ चुका है उत्तर भारत में सर्दी धीरे
धीरे बड़ता जा रहा है.ठंडी से बचने के लिए सुर्यदेव का साहरा ले रहें है.राजनीति
कि बात किया जाये तो ये बच्चे वोटर नहीं है वोट देकर सत्ता दिला नहीं सकते हैं.
बात गाय कि जाये तो उसके नाम पर वोट मांगा जाता है. गोरक्षक के नाम पर हिन्दुत्व
की वोट हासिल किया जा सकता है. बच्चे के नाम पर वोट कोन देगा. ये सब गरीब परिवार
के है जिसके पास कोट खरिदने के लिए पैसा नहीं है. देश में आर्थिक संकट और महंगाई
के कारण इन परिवार के पास पर्याप्त अर्थ नहीं है.
सबसे हैरान की बात ये कि जब प्रदेश
के बेसिक शिक्षामंत्री सतीश द्वीवेदी से इसबारे में पुछा गया कि क्या स्कुल के
बच्चे को स्वेटर दिया नहीं गया? इस
पर मंत्री जी बयान भी हैरान करने वाला था
उन्होंने कहा कि यंहा दिसंबर के बाद ही ठंडी पड़ता है. इस लिए नहीं दिया
गया. ये बच्चे क्रिसमस के बाद ही कोट पहनते है. अब मंत्री जी से सवाल ये है कि
क्या आपके घर में आज भी एसी चलता होगा. क्योंकि आप तो जनता के पैसे पर आराम की
जीवन व्यतीत करते है. उनके पास तो अपने बच्चे कि फिक्र होता है जनता की बच्चे आपको
क्या देगा?. उन बच्चे कि जीवन कि कीमत सिंहासन
पर विराज या विपक्ष में बैठे राजनीति पार्टी नहीं समझेगी. क्योंकि इस देश में
सत्ता ही सर्वपोरि है.
EDITORIAL BY- CHANDAN DAS
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